दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में पुलिस की कार्रवाई के लगभग दो हफ़्ते बाद, पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स ने इस पर एक फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट जारी की है.
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गुरुवार को रिलीज की गई इस रिपोर्ट का नाम 'द ब्लडी संडे 2019' रखा गया है. इसमें यह दावा किया गया है कि दिल्ली पुलिस ने छात्रों को 13 दिसंबर को संसद तक मार्च निकालने से रोका, और उनपर 'अत्यधिक और अंधाधुंध लाठीचार्ज' किया गया. इसमें यह भी लिखा गया है कि जो छात्र उस प्रदर्शन में शामिल नहीं थे, उनपर भी हमले किये गये.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इस हिंसा में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए थे, वहीं कुछ छात्रों को हिरासत में भी लिया गया था.
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रिपोर्ट में यह भी लिखा गया है कि पुलिसकर्मियों का उद्देश्य केवल भीड़ मैनेज करना नहीं बल्कि 'छात्रों को चोट पहुंचाना' भी था.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट ने मथुरा रोड के पास पुलिस के एक्शन को बर्बरतापूर्ण बताया. इसमें कहा गया है कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिसमें यह साफ़ हो कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रुकने के लिए कहा.
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पुलिस बिना इजाज़त जामिया के कैंपस में घुसी और इसकी अग्रिम सूचना उसने कैंपस प्रशासन तक को नहीं दी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गेट के पास, कैंपस के अंदर, लाइब्रेरी और रीडिंग रूम में लगे सीसीटीवी कैमरों में पुलिस की तोड़फोड़ कैद हुई है जो उनके इरादों के पक्के सबूत हैं.
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इसके साथ ही रिपोर्ट यह भी दावा करती है कि जिन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया है उन्हें उनके परिजनों और वकीलों से नहीं मिलने दिया जा रहा है और न ही उन्हें मेडिकल सुविधा ही मुहैया कराई जा रही है.
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जुमे की नमाज़ को लेकर यूपी के कई ज़िलों में इंटरनेट पर रोक
नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर चल रहे विरोध के मद्देनजर पूरे उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट जारी किया गया है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
प्रदेश के नौ ज़िलों में जुमे की नमाज़ को देखते हुए इंटरनेट सेवा बंद करने का फ़ैसला लिया गया है. इस दौरान किसी भी तरह के प्रदर्शन, जुलूस और रैली पर पूरी तरह पाबंदी लगाई गई है.
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ये ज़िले हैं कानपुर, गाज़ियाबाद, बुलंदशहर, मेरठ, मुज़फ़्फ़रनगर, बागपत, शामली, आगरा और फ़िरोज़ाबाद, जहां शुक्रवार को पुलिस की कड़ी निगरानी रहेगी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
शुक्रवार को नमाज़ के बाद के माहौल को शांत रखने के लिहाज से पीएसी और अर्द्धसैनिक बलों को लगाया गया है और ड्रोन कैमरे से भी निगरानी की जा रही है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
यूपी के कुछ ज़िलों में बीते शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के बाद प्रदर्शनों के दौरान हिंसा हुई थी.
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कर्नाटक के मंगलुरु में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ हुए प्रदर्शन में मारे गए दो प्रदर्शनकारियों के मामले में राजनीति बढ़ती जा रही है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने दोनों मृतकों के परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की और फिर उसे वापस लेते हुए इस मामले में जांच के आदेश दे दिए.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को यह घोषणा की कि उनकी तृणमूल कांग्रेस पार्टी कर्नाटक के मंगलुरु में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के दौरान मारे गए दो लोगों के परिवारों को पांच लाख रुपये देगी.
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ममता ने कहा, "तृणमूल कांग्रेस, ग़रीब पार्टी होने के बावजूद, इन परिवारों की मदद के लिए मजदूर संघ के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल कर्नाटक भेजेगी और हम प्रत्येक परिवार को पांच लाख रुपये देंगे."
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कर्नाटक बीजेपी ने ममता की इस घोषणा पर प्रतिक्रिया दी है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा, "रेलवे को 300 करोड़ का नुकसान हुआ लेकिन दोषियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर तक नहीं की गई. उन्होंने अपना जन समर्थन खो दिया है."
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मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (सीपीएम) नेता प्रकाश करात ने गुरुवार को कहा कि केरल और पश्चिम बंगाल की तरह 10 और राज्यों के मुख्यमंत्री अपने वादे पर टिके रहे और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) का काम रोक दें, तो एनपीआर को लेकर केंद्र की योजना 'दफ़न' हो जाएगी.
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चेन्नई में वामपंथ समर्थित संगठन की ओर से नागरिकता क़ानून में संशोधन के विरोध में आयोजित एक सेमिनार को करात संबोधित कर रहे थे.
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न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक करात ने कहा, "अब तक 12 राज्यों ने घोषणा की है कि वे एनपीआर नहीं होने देंगे. केरल और पश्चिम बंगाल ने जो किया है, 10 और मुख्यमंत्रियों को करना होगा."
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विकिपीडिया वेबसाइट चलाने वाली विकीमीडिया फ़ाउंडेशन ने तुर्की के एक कोर्ट के उस फ़ैसले का स्वागत किया है जिसमें कहा गया है कि उनकी वेबसाइट पर देशव्यापी प्रतिबंध असंवैधानिक है.
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अदालत ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि देशभर में वेबसाइट पर रोक लगाना अभिव्यक्ति के अधिकार का उल्लंघन है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
तुर्की सरकार ने साल 2017 में विकीपीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया था.
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ये प्रतिबंध वेबसाइट पर मौजूद उन जानकारियों को देखते हुए लगाया गया था जिनमें लिखा गया था कि तुर्की ने सीरिया में आतंकी संगठनों को समर्थन किया था.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
विकीमीडिया फ़ाउंडेशन इस मामले को लेकर यूरोपीय मानवाधिकार कोर्ट में भी गई है.
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कोर्ट में मौजूद फ़ाउडेंशन के मुख्य वक़ील शैन ने कहा, "विकीमीडिया इस फ़ैसले का स्वागत करता है. लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि यूरोपीय मानवाधिकार कोर्ट से इसे वापस ले लिया जाएगा. हमें तुर्की के संवैधानिक कोर्ट के इस फ़ैसले को बारीकी से देखने के लिए वक़्त लेना होगा. हमें इसके सभी आयामों को देखना होगा." मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
Friday, December 27, 2019
Monday, December 9, 2019
अमित शाह ने कहा, कांग्रेस ने धर्म के आधार पर किया देश का विभाजन
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल को लेकर कांग्रेस को घेरा है.
विधेयक के समर्थन में उन्होंने कहा कि इस विधेयक की इसलिए ज़रूरत पड़ी, क्योंकि कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का विभाजन किया.
अमित शाह ने विधेयक पेश करने की अनुमति मांगी, तो लोकसभा में हंगामा हो गया. अधीर रंजन चौधरी समेत कई विपक्षी नेताओं ने इस मामले पर केंद्र सरकार को घेरा.
लेकिन अमित शाह ने विधेयक के पक्ष में कई तर्क रखे. बाद में मतदान हुआ और 293 सदस्यों ने विधेयक पेश करने के पक्ष में मतदान किया. 82 सदस्यों ने इसके ख़िलाफ़ वोटिंग की.
इससे पहले सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने ये कहते हुए बिल का विरोध किया कि ये समाज को पीछे ले जानेवाला है, जिसका ध्येय एक ख़ास मज़हब के लोगों को निशाना बनाना है.
अधीर रंजन चौधरी ने हंगामे के बीच संविधान की प्रस्तावना का ज़िक्र किया और कहा कि ये संविधान की भावना के विरूद्ध है जिसमें धर्मनिरपेक्षता, बराबरी और समाजवाद का ज़िक्र है.
सदस्यों का कहना था कि इसमें मुसलमानों को निशाना बनाया गया है. इसपर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ये बिल 000.1 फ़ीसद भी मुसलमानों के विरुद्ध नहीं है और विधेयक में कहीं भी मुसलमानों का ज़िक्र नहीं किया गया है.
टीएमसी के सुगत रॉय ने कहा है कि वो विधेयक का विरोध करते हैं.
अमित शाह ने कहा है कि ये बिल किसी भी क़ानून का उल्लंघन नहीं करता है. इसपर संसद में विपक्ष के सदस्य हंगामा मचाने लगे.
अमित शाह ने हंगामा ख़त्म होने के बाद कहा कि बिल किसी भी दृष्टिकोण से संविधान को ठेस नहीं पहुंचाता है.
संविधान की धारा 14 के बारे में उन्होंने कहा, जिसे लेकर अधिकतर सदस्य इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं. उनके मुताबिक़ इससे समानता का अधिकार आहत होगा.
अमित शाह का तर्क था कि मुनासिब आधार पर धारा 14 संसद को क़ानून बनाने से नहीं रोक सकता है.
1971 में इंदिरा गांधी ने निर्णय किया कि बांग्लादेश से जितने लोग आए हैं उन्हें नागरिकता दी जाएगी, तो पाकिस्तान से आए लोगों को नागरिकता क्यों नहीं दी गई.
उन्होंने युगांडा से आए लोगों को नागरिकता दिए जाने का भी हवाला दिया.
भारत के गृह मंत्री का कहना था कि प्रस्तावित क़ानून को समझने के लिए तीनों देश को समझना होगा.
अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के संविधानों का ज़िक्र करते हए अमित शाह ने कहा कि तीनों मुल्कों का राजकीय धर्म इस्लाम है.
बंटवारे के वक़्त लोगों का जाना इधर से उधर हुआ. नेहरू-लियाक़त समझौते का ज़िक्र करते हुए भारत के गृह मंत्री का कहना था कि इसमें अल्पसंख्यकों की हिफ़ाज़त की बात की गई थी जिसका पालन भारत में तो हुआ लेकिन दूसरी तरफ़ ऐसा नहीं हुआ.
अमित शाह का कहना है कि जिन पड़ोसी देशों का ज़िक्र बिल में हुआ है वहां पारसी, हिंदू, सिख और दूसरे समुदायों की धार्मिक प्रताड़ना हुई है.
अमित शाह का कहना था कि मुसलमानों को नागरिकता के लिए आवेदन देने से किसी ने नहीं रोका है. 'पहले भी बहुत सारे लोगों को दिया है, आगे भी देंगे. धर्म के आधार पर देश का विभाजन कांग्रेस पार्टी नहीं करती तो इस बिल की ज़रूरत नहीं पड़ती.'
नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) को संक्षेप में CAB भी कहा जाता है और यह बिल शुरू से ही विवाद में रहा है.
विधेयक पर विवाद क्यों है, ये समझने के लिए इससे जुड़ी कुछ छोटी-छोटी मगर महत्वपूर्ण बातों को समझना ज़रूरी है.
इस विधेयक में बांग्लादेश, अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के छह अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख) से ताल्लुक़ रखने वाले लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव है.
मौजूदा क़ानून के मुताबिक़ किसी भी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल भारत में रहना अनिवार्य है. इस विधेयक में पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के लिए यह समयावधि 11 से घटाकर छह साल कर दी गई है.
इसके लिए नागरिकता अधिनियम, 1955 में कुछ संशोधन किए जाएंगे ताकि लोगों को नागरिकता देने के लिए उनकी क़ानूनी मदद की जा सके.
मौजूदा क़ानून के तहत भारत में अवैध तरीक़े से दाख़िल होने वाले लोगों को नागरिकता नहीं मिल सकती है और उन्हें वापस उनके देश भेजने या हिरासत में रखने के प्रावधान है.
विधेयक के समर्थन में उन्होंने कहा कि इस विधेयक की इसलिए ज़रूरत पड़ी, क्योंकि कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का विभाजन किया.
अमित शाह ने विधेयक पेश करने की अनुमति मांगी, तो लोकसभा में हंगामा हो गया. अधीर रंजन चौधरी समेत कई विपक्षी नेताओं ने इस मामले पर केंद्र सरकार को घेरा.
लेकिन अमित शाह ने विधेयक के पक्ष में कई तर्क रखे. बाद में मतदान हुआ और 293 सदस्यों ने विधेयक पेश करने के पक्ष में मतदान किया. 82 सदस्यों ने इसके ख़िलाफ़ वोटिंग की.
इससे पहले सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने ये कहते हुए बिल का विरोध किया कि ये समाज को पीछे ले जानेवाला है, जिसका ध्येय एक ख़ास मज़हब के लोगों को निशाना बनाना है.
अधीर रंजन चौधरी ने हंगामे के बीच संविधान की प्रस्तावना का ज़िक्र किया और कहा कि ये संविधान की भावना के विरूद्ध है जिसमें धर्मनिरपेक्षता, बराबरी और समाजवाद का ज़िक्र है.
सदस्यों का कहना था कि इसमें मुसलमानों को निशाना बनाया गया है. इसपर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ये बिल 000.1 फ़ीसद भी मुसलमानों के विरुद्ध नहीं है और विधेयक में कहीं भी मुसलमानों का ज़िक्र नहीं किया गया है.
टीएमसी के सुगत रॉय ने कहा है कि वो विधेयक का विरोध करते हैं.
अमित शाह ने कहा है कि ये बिल किसी भी क़ानून का उल्लंघन नहीं करता है. इसपर संसद में विपक्ष के सदस्य हंगामा मचाने लगे.
अमित शाह ने हंगामा ख़त्म होने के बाद कहा कि बिल किसी भी दृष्टिकोण से संविधान को ठेस नहीं पहुंचाता है.
संविधान की धारा 14 के बारे में उन्होंने कहा, जिसे लेकर अधिकतर सदस्य इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं. उनके मुताबिक़ इससे समानता का अधिकार आहत होगा.
अमित शाह का तर्क था कि मुनासिब आधार पर धारा 14 संसद को क़ानून बनाने से नहीं रोक सकता है.
1971 में इंदिरा गांधी ने निर्णय किया कि बांग्लादेश से जितने लोग आए हैं उन्हें नागरिकता दी जाएगी, तो पाकिस्तान से आए लोगों को नागरिकता क्यों नहीं दी गई.
उन्होंने युगांडा से आए लोगों को नागरिकता दिए जाने का भी हवाला दिया.
भारत के गृह मंत्री का कहना था कि प्रस्तावित क़ानून को समझने के लिए तीनों देश को समझना होगा.
अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के संविधानों का ज़िक्र करते हए अमित शाह ने कहा कि तीनों मुल्कों का राजकीय धर्म इस्लाम है.
बंटवारे के वक़्त लोगों का जाना इधर से उधर हुआ. नेहरू-लियाक़त समझौते का ज़िक्र करते हुए भारत के गृह मंत्री का कहना था कि इसमें अल्पसंख्यकों की हिफ़ाज़त की बात की गई थी जिसका पालन भारत में तो हुआ लेकिन दूसरी तरफ़ ऐसा नहीं हुआ.
अमित शाह का कहना है कि जिन पड़ोसी देशों का ज़िक्र बिल में हुआ है वहां पारसी, हिंदू, सिख और दूसरे समुदायों की धार्मिक प्रताड़ना हुई है.
अमित शाह का कहना था कि मुसलमानों को नागरिकता के लिए आवेदन देने से किसी ने नहीं रोका है. 'पहले भी बहुत सारे लोगों को दिया है, आगे भी देंगे. धर्म के आधार पर देश का विभाजन कांग्रेस पार्टी नहीं करती तो इस बिल की ज़रूरत नहीं पड़ती.'
नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) को संक्षेप में CAB भी कहा जाता है और यह बिल शुरू से ही विवाद में रहा है.
विधेयक पर विवाद क्यों है, ये समझने के लिए इससे जुड़ी कुछ छोटी-छोटी मगर महत्वपूर्ण बातों को समझना ज़रूरी है.
इस विधेयक में बांग्लादेश, अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के छह अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख) से ताल्लुक़ रखने वाले लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव है.
मौजूदा क़ानून के मुताबिक़ किसी भी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल भारत में रहना अनिवार्य है. इस विधेयक में पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के लिए यह समयावधि 11 से घटाकर छह साल कर दी गई है.
इसके लिए नागरिकता अधिनियम, 1955 में कुछ संशोधन किए जाएंगे ताकि लोगों को नागरिकता देने के लिए उनकी क़ानूनी मदद की जा सके.
मौजूदा क़ानून के तहत भारत में अवैध तरीक़े से दाख़िल होने वाले लोगों को नागरिकता नहीं मिल सकती है और उन्हें वापस उनके देश भेजने या हिरासत में रखने के प्रावधान है.
Tuesday, December 3, 2019
ध्यानचंद का भारत रत्न कैसे 'गोल' कर गईं सरकारें
अपने जीवन काल में ही एक मिथकीय हीरो बन चुके हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को मरणोपरांत देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' दिए जाने की मांग और चर्चा अक्सर होती रही है लेकिन यह जानना दिलचस्प होगा कि उन्हें यह सम्मान क्यों और कैसे नहीं मिला?
आज मेजर ध्यानचंद की 40वीं पुण्यतिथि है.
2014 में मेजर ध्यानचंद के नाम की सिफ़ारिश को ठुकराते हुए तत्कालीन यूपीए सरकार ने क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को 'भारत रत्न' दे दिया था.
आरटीआई से मिली जानकारियों के मुताबिक 2013 में मेजर ध्यानचंद का बायोडेटा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यालय में कई महीने पहले ही पहुंच चुका था. उस पर पीएम की स्वीकृति भी मिल चुकी थी लेकिन बाद में अचानक सचिन के नाम पर मुहर लगा दी गई.
11 अप्रैल 2011 को भाजपा सांसद मधुसूदन यादव ने केंद्र सरकार से सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिए जाने के लिए नियमों में बदलाव का आग्रह किया था. तब तक यह सम्मान साहित्य, कला, विज्ञान और जनसेवा के क्षेत्र में दिया जाता था, खिलाड़ियों के लिए भारत का शीर्ष सम्मान अर्जुन अवार्ड है.
इसके बाद सरकार ने भारत रत्न सम्मान के नियमों में बदलाव करते हुए उल्लेखनीय कार्य करने वाले सभी भारतीयों को अवार्ड के योग्य माना जिसमें खेलकूद भी शामिल हो गया. 22 दिसंबर 2011 को इंडियन हॉकी फ़ेडरेशन ने ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने की सिफारिश की.
मेजर ध्यानचंद के पुत्र और पूर्व ओलम्पियन हॉकी खिलाड़ी अशोक कुमार बताते हैं कि "पूर्व क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल 12 जुलाई 2013 को तत्कालीन खेल मंत्री जितेंद्र सिंह से मिल कर भारत रत्न ध्यानचंद को दिए जाने की मांग के साथ ध्यानचंद जी का एक बायोडेटा सौंपा, जिस पर खेल मंत्री से लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक की सहमति रही. अनौपचारिक रूप से मुझसे कहा गया कि ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा कुछ माह में ही कर दी जाएगी. लेकिन, बाद में पासा ही पलट गया."
आरटीआई एक्टिविस्ट और खेल प्रेमी हेमंत दुबे ने मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने से जुड़ी सभी फाइलों की मांग भारत सरकार से की थी.
इन दस्तावेजों से यह बात साफ हो जाती है कि आनन-फानन सचिन को भारत रत्न देने की औपचारिकता पूरी कर ली गई.
14 नवंबर 2013 से वेस्टइंडीज के ख़िलाफ़ सचिन का विदाई टेस्ट शुरू हुआ, अगले दिन 15 नवंबर को प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्रपति के पास भेजा, जिसे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने तत्काल मंजूर कर दिया, 16 नवंबर को मैच ख़त्म होने से पहले ही सचिन को भारत रत्न देने की घोषणा कर दी गई.
वहीं, दूसरी ओर 17 जुलाई 2013 को खेल मंत्रालय ने मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने की विधिवत सिफारिश प्रधानमंत्री को भेजी. मेजर ध्यानचंद की फाइल पीएमओ ऑफिस में महीनों चलती रही. मेजर ध्यानचंद के पुत्र और पूर्व ओलम्पियन अशोक कुमार बताते हैं जब निर्णय की बारी आई तो फैसला ही पलट दिया गया.
आज मेजर ध्यानचंद की 40वीं पुण्यतिथि है.
2014 में मेजर ध्यानचंद के नाम की सिफ़ारिश को ठुकराते हुए तत्कालीन यूपीए सरकार ने क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को 'भारत रत्न' दे दिया था.
आरटीआई से मिली जानकारियों के मुताबिक 2013 में मेजर ध्यानचंद का बायोडेटा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यालय में कई महीने पहले ही पहुंच चुका था. उस पर पीएम की स्वीकृति भी मिल चुकी थी लेकिन बाद में अचानक सचिन के नाम पर मुहर लगा दी गई.
11 अप्रैल 2011 को भाजपा सांसद मधुसूदन यादव ने केंद्र सरकार से सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिए जाने के लिए नियमों में बदलाव का आग्रह किया था. तब तक यह सम्मान साहित्य, कला, विज्ञान और जनसेवा के क्षेत्र में दिया जाता था, खिलाड़ियों के लिए भारत का शीर्ष सम्मान अर्जुन अवार्ड है.
इसके बाद सरकार ने भारत रत्न सम्मान के नियमों में बदलाव करते हुए उल्लेखनीय कार्य करने वाले सभी भारतीयों को अवार्ड के योग्य माना जिसमें खेलकूद भी शामिल हो गया. 22 दिसंबर 2011 को इंडियन हॉकी फ़ेडरेशन ने ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने की सिफारिश की.
मेजर ध्यानचंद के पुत्र और पूर्व ओलम्पियन हॉकी खिलाड़ी अशोक कुमार बताते हैं कि "पूर्व क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल 12 जुलाई 2013 को तत्कालीन खेल मंत्री जितेंद्र सिंह से मिल कर भारत रत्न ध्यानचंद को दिए जाने की मांग के साथ ध्यानचंद जी का एक बायोडेटा सौंपा, जिस पर खेल मंत्री से लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक की सहमति रही. अनौपचारिक रूप से मुझसे कहा गया कि ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा कुछ माह में ही कर दी जाएगी. लेकिन, बाद में पासा ही पलट गया."
आरटीआई एक्टिविस्ट और खेल प्रेमी हेमंत दुबे ने मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने से जुड़ी सभी फाइलों की मांग भारत सरकार से की थी.
इन दस्तावेजों से यह बात साफ हो जाती है कि आनन-फानन सचिन को भारत रत्न देने की औपचारिकता पूरी कर ली गई.
14 नवंबर 2013 से वेस्टइंडीज के ख़िलाफ़ सचिन का विदाई टेस्ट शुरू हुआ, अगले दिन 15 नवंबर को प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्रपति के पास भेजा, जिसे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने तत्काल मंजूर कर दिया, 16 नवंबर को मैच ख़त्म होने से पहले ही सचिन को भारत रत्न देने की घोषणा कर दी गई.
वहीं, दूसरी ओर 17 जुलाई 2013 को खेल मंत्रालय ने मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने की विधिवत सिफारिश प्रधानमंत्री को भेजी. मेजर ध्यानचंद की फाइल पीएमओ ऑफिस में महीनों चलती रही. मेजर ध्यानचंद के पुत्र और पूर्व ओलम्पियन अशोक कुमार बताते हैं जब निर्णय की बारी आई तो फैसला ही पलट दिया गया.
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